लालू-नितीश के बीच दरारें , फिर से "नमो-नितीश" मिलेंगे बिहार में ?

     राजनीति में ना तो कोई किसी का सगा होता है और ना ही दुश्मन। अगर बिहार की वर्तमान राजनीती का विश्लेषण किया जाये तो ऐसा लगेगा मानो महागठबंधन की सरकार शांतिपूर्ण तरीके से काम कर रही है। परंतु, ऐसा बिलकुल नहीं है। हाल ही में अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट द संडे गार्जियन लाइव में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक नितीश कुमार अपनी गठबंधन की पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से नाराज़ हैं और फिर से भाजपा के साथ  मिलकर सरकार बनाने जैसे विकल्पों की ओर ध्यान दे रहें हैं। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक वेबसाइट का ये भी दावा करना है कि जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने दिल्ली में भाजपा के साथ बैठक कर इस सन्दर्भ में बातचीत भी की है।
    हालाँकि, महागठबंधन के नेतागण बार-बार ये सफाई देते हुए पाए गए की महागठबंधन में कोई दरारें नहीं हैं और सरकार अपने तौर-तरीकों से काम कर रही है। अब सोचने वाली बात ये भी है कि अगर सरकार शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है तो फिर सफाई देने की जरुरत क्यों पड़ रही है? सच्चाई तो ये है की आये दिन राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सरकार के कामों में हस्तक्षेप करते रहते हैं, जो कि नितीश कुमार को रास नहीं आती। 
अगर राजनैतिक संभावनाओ को मद्देनज़र रखते हुए देखा जाये तो जदयू का भाजपा के साथ सरकार बनाना मुमकिन है।

बिहार विधानसभा चुनाव का दलगत परिणाम: 
  • राजद : 81 सीट
  • जदयू : 70 सीट
  • कॉंग्रेस : 27 सीट
  • भाजपा : 53 सीट
243 सीट वाले इस राज्य में में सरकार बनाने के लिए कुल 122 सीटों की आवश्यकता होती है।  इस अनुसार अगर देखा जाये तो जदयू और भाजपा की कुल ( 70 + 53  = 123 ) सीटें होती है। मतलब भाजपा और जदयू का बिहार में मिलना मुमकिन है।
ख़ैर, नितीश कुमार भाजपा के साथ मिले या न मिले इस खबर की तो कोई पुष्टि नहीं है, पर द गार्जियन वेबसाइट के इस दावे के अनुसार नितीश कुमार ने लालू प्रसाद को ये ज़रूर बता दिया कि अगर वो सरकार में हस्तक्षेप करेंगे तो नितीश कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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